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Showing posts from October, 2017

बड़े भाई साहब - याद हैं न !

माता-पिता, मातृभाषा, शहर, साहित्य, शिक्षा, संस्कृति, स्कूल, मान्यताएं, संस्कार, आस पड़ोस के लोग, खानपान, रहन सहन और वातावरण इन सभी का जोड़  हैं 'हम'! हमने बारहवीं तक एक ही बोर्ड से पढ़ाई करी है, हिंदी मीडियम, इलाहबाद या उत्तर प्रदेश बोर्ड ! प्रत्येक राज्य के बोर्ड की अपनी मातृभाषा की कुछ पुस्तकें होती हैं, वहाँ के अध्यापकों, स्कूलों की कुछ रवायतें होती हैं जिनकी अमिट छाप जीवन भर के लिए विद्यार्थी के स्मृतिपटल पर अंकित हो जाती है, स्कूल के बाहर लगने वाली दुकानों पर मिलने वाली भेल, लइया चना, चूरन, इमली, कैथे, कमरख के स्वाद होते हैं, जो फिर कभी चखने नहीं मिलते ! कुछ कवितायेँ , किसी टीचर के किस्से, किसी खास लेखक की कोई कहानी, जिसका रसास्वादन आजीवन होता रहता है ! है न ! मेरी सबसे पसंदीदा कहानियों में प्रेमचंद जी की 'बड़े भाई साहब' है ! कुछ डूबता कुछ उछलता सा है मन में, जब भी मैं उस कहानी को याद करती हूँ, हालाँकि वह कहानी अपने पाठ्यक्रम में नहीं थी, फिर भी शायद तुम लोगों को याद हो एक बार मैं अपनी एक सहेली वर्तिका के पास से प्रेमचंद का कहानी संकलन ले आयी थी जिसे हम सब ने बारी बा...

पूर्वकथन

मेरे प्यारे भाइयों और बहनों ! जब से मेरी शादी हुई है तब से मैं बहुत व्यस्त रहने लगी हूँ, पहले तो घर गृहस्थी का काम और फिर मेंटर प्लस मतलब मेरी ट्यूशन क्लासेज, दिन के पाँच घंटे उसमें भी देती हूँ, इस प्रकार आर्थिक स्वतंत्रता और स्वत्व दोनों ही निभ जाते हैं और मेरा मन भी लगा रहता है, बच्चों और उनकी गतिविधियों के निरीक्षण से मेरा स्वयं का जीवन और उसकी गूढ़ता जैसे उमड़ उमड़ कर सामने आने लगी है तिस पर तरह तरह की पुस्तकों का पूर्व अध्ययन भी बहुत काम आ रहा है ! इन सबके बीच मैं अपनी दो बहनों और भाई को अक्सर याद करती हूँ, कुछ जिम्मेदारी है मुझ पर उसका बोध होता रहता है, यूँ तो फ़ोन पर बातचीत अक्सर ही हो जाती है, वीडियो कॉल ने तो और भी सुविधा कर दी है, हालाँकि कॉल क़्वालिटी बहुत अच्छी नहीं रहती पर फिर भी मन को बहुत तसल्ली होती है , ऐसा नहीं लगता कि हम कुछ मिस कर रहे हैं, पर मिस तो कर ही रहे हैं, ज्यादातर बातचीत हम सभी के जीवन में घटने वाली दैनिक घटनाओं पर ही आधारित होती है, जिसमें हम चाहते हुए भी एक दूसरे की कोई मदद नहीं कर पाते हैं और न ही कभी इतना समय मिलता है कि होने वाली इन घटनाओं की बैठ के समीक्ष...